आज जो ये बाल उड़ते जा रहे है चेहरा छुपा ,मुझे सताना चाह रहे है। ना नजरें चुराओ तुम यूं फिर से, हम फुर्सत से तुम्हे मानना चाह रहे है। ________________ गर होते हम पंछी तो क्या अपने परों से खुद को छुपाती? तो हम भी भीगा कर कुछ पर अपने, तुम्हारे पास उड़ ,तुमको भिगाना चाह रहे है। ना नजरें चुराओ तुम यूं फिर से, हम फुर्सत से तुम्हे मनाना चाह रहे है । _________________ ज़रा ढूंढो तो कुछ अपने सामान में तुम, ये कान चूड़ी की खनक याद रखना चाहते है। तरसती है ज़मी तुम्हारे आंचल के छूवन को, हर कोना तुम्हारी खुशबू में महकना चाहता है। ना नजरें चुराओ तुम यूं फिर से, हम फुर्सत से तुम्हे मनाना चाह रहे है ।