पूजित पंचमी शुभारंभ
लिए मुकुट पीत सुमन का,
राह देखते तरुवर सब
समय हुआ तुम्हारे आगमन का
फूल बिछाए राहों में,
सभी तुम्हारे प्रतीक्षारत हैं
ऋतुराज तुम्हारा स्वागत है,
ऋतुराज बसंत तुम्हारा स्वागत है
सोंधी सोंधी हवाएं बहती,
चिड़िया जाने क्या बात है कहती
क्या फूलों के रंग इन्हें भा गए,
यह दोस्त पुराने मिलने आ गए ???
उपवन सजाते वन महकाते ,
चल रहा तुम्हारा रथ है
ऋतुराज तुम्हारा स्वागत है,
ऋतुराज बसंत तुम्हारा स्वागत है
छोटी सी दूब ने ली अंगड़ाई,
सूरज की किरण मुंह धोने को आई
खिलखिलाते फूल देख,
रंग बिरंगी तितली मंडराई
जीवन रहस्य लिए बीज वह,
वृक्ष बनने को प्रशस्त है
ऋतुराज तुम्हारा स्वागत है,
ऋतुराज बसंत तुम्हारा स्वागत है।
उड़ते रंग गुलाल कह गए,
ऋतुराज आए और तुम बिना रंगे रह गए?
आओ रंगों में सराबोर हो जाए,
खुशियां बांटे सबको फूल जैसे हो जाए
जीवन में उमंग, सृष्टि मे उत्सव है
ऋतुराज तुम्हारा स्वागत है,
ऋतुराज बसंत तुम्हारा स्वागत है।
-मेधा जोशी
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