कुछ जिदंगी जी ली मैने भी,
तेरे किस्से सुन, तेरे साथ ही ।
कुछ पल को मिले हो तुम,
ज्यादा लम्बी ये मुलाकात नहीं।
घटों सुनती हूँ तेरी बातें,
बस देखने को तेरी मुस्कुराहटें ।
कुछ बातें तेरी, जैसे चिड़िया की चहचाहट,
अच्छी तो बहुत लगती है, पर समझना ज़रूरी नहीं ।
शायद और कोई खुशी ना दे पाऊं तुझे,
इसीलिए, सुनती हूँ तेरे उम्र भर के किस्से,
इस रिश्ते की छोटी उम्र में ही।
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