ये किस्से कहानी यारियां यही छूट जानी है ,
साथ मुझे अपने ये जिंदगी बितानी है।
वक्त रहते वक्त देना सीख लूं खुद को,
तो जान पाऊ ये राज़ कि, खुद ही खुद की मुहब्बत बनना जिंदगानी है ।
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ये खुशबू मिट्टी की
जो अटकी है मेरी यादें में
तुम जो नहीं हो अब,
ये बारिश मुझे भिगा ना पाएगी।
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बहुत कुछ है इस दुनिया में पाने को ,
इन पलकों को सपनों से रंग तो सही।
यों न हौसले तोड अभी से,
कि अरमां पूरे होंगे कि नहीं।
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वो तोड़ता चला
हमारी यादों की हर तस्वीर को,
और मैं रोकने उसे
उस टूटे कांच पर चलती रही।
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मेरे सपनों पर जमी धूल हटा दे,
मुझे उस बारिश का इंतजार है।
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अब की बार आओगे तो थोड़ी फुरसत लेते आना
बैठो लम्हा भर साथ, थोड़ी कुर्बत देते जाना।
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इस ज़िद्दी दिल को समझाएं कैसे
यादों की इस आग को बुझाए कैसे
रंजिश रोज करता है तेरे दीदार की
इस नापाक दिल को पाक बनाएं कैसे।
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