कुछ आंखे हैं सहमी हुई,कुछ वेदना से बहती हुई।
कुछ सच छुपाए ताकती, कुछ अनकही बाते कह रही।
खामोशी से हैं ताकते ,जब जलता घर गैर का होता है।
जब आग लगेगी चारो ओर, तब देखिए कौन सोता है!
कल किस्से सुनाते फिरेंगे,जिन होंठो पर आज विश्राम है।
तमाशा ध्यान से देखो,आग बुझाना भी क्या कोई काम है?
अब बेचारगी का तमगा जलते घर वालो के नाम है,
और जब तक नया घर न जले,इनका किस्सा आम है।
जब लड़ना पड़े सही के लिए,तो कहिए ,यहां कौन किसी का होता है।
जब आग लगेगी चारो ओर, तब देखिए कौन सोता है!
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